जल-शक्ति-मंत्रालय

दिनांक: June 10, 2019

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नवगठित सरकार नें देश में पेय जल उपलब्धता एवम् जल कें गहरातें संकटों कें मंत्रालय के व्यापक उद्वेश्यों कें तहत जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है। इस मंत्रालय कें अधीन जहाँ एक ओंर प्रत्येंक घर तक जल की सुरक्षित पहुचँ का उद्वेश्य जुडा है। वही गंगा समेत देश की समस्त प्रदूषित होती नदियों कों स्वच्छ बनानें सबंधी प्रयासों कों भी नयें सिरें सें संरचित कियें जानें की महत्वाकांक्षा भी जुडी है।

सरकार नें पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय तथा जल संसाधन नदी विकास व गंगा संऱक्षण मंत्रालय को मिलाकर जल शक्ति मंत्रालय का निर्माण किया है। जिसका उत्तदायित्व गजेंन्द्र सिहं शेखावत कों दिया गया है।

मंत्रालय कें गठन कें उद्वेश्य-

1-अतंर्राष्ट्रीय एवंम् अन्तर्राज्जीय नदी जल विवादों का निस्तारण ।

2-गंगा सफाई एवम् पुनरूद्वार कें कार्य नमामि गंगें योजना कें अधीन कों नई ऊर्जा प्रदान करना।

3- नदी जांडनें  संबधी प्रस्तावित पारियोंजनाओं कों बेहतर व विशिष्टीकृत नीतियों कें साथ (पर्यावरणीय पहलुओं कों ध्यान में रखतें हुए)संचालित करना।

4- प्रत्येक घर में स्वच्छ जल कों सुनिश्चित करना जैसा कि सत्ताधारी दल नें अपनें चुनावी घोषणा पत्र में जल जीवन मिशन चलानें एवं 2024 तक प्रत्येक घर कें परिसर में नल सें जल मुहैया करवानें का वादा किया है।

जल शक्ति मंत्रालय कें सम़क्ष चुनौतियां एवंम् उसकी आवश्यकताएं -

1-देशयापी जल आपूर्ति- 2018 की नीति आयोग की रिपोर्ट कें अनुसार भारत अपनें इतिहास में सर्वाधिक गहरें जल संकट सें जूझ रहा है। इस सबंध में नीति आयोग नें अग्रदर्शित आकडें जारी कियें थें।

1- भारत में लगभग 600 मिलियन लोग अति गंभीर जल संकट ;म्गजतमउम ूंजमत ेजतमेद्धसें त्रस्त है।

2- भारत में प्रतिवर्ष 2 लाख लोंगों की मृत्यु साफ व स्वच्छ जल न मिलनें सें जलीय जनित रोंगों सें हो जाती है। जैसें हैजा ,टायॅफाइड ,कॉलरा इत्यादि।

3- 75% भारतीय घरों में जल ,घरों कें परिसर में उपलब्ध नही है। अर्थात् जल प्राप्ति हेतू घरों सें बाहर जाना पडता है।

4-70 %उपलब्ध पेयजल दूषित अवस्था में है।

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इन आकडों सें स्पष्ट है। कि पेयजल संबधी संकट जिसमें पेयजल स्वच्छता ,सहजप्राप्ति पंहुच अत्यतं भयावह स्तर तक विकसित हां चुका है। जों जलशक्ति मंत्रालय कें समक्ष एक चुनौती होगी।

नीति आयोग की एक अन्य रिपोर्ट कें अनुसार 2020 तक भारत कें 21 बडें शहरों जिसमें नई दिल्ली बेगलुरू ,चेन्नई एवं हैदराबाद भी है। में भूगर्भीय जल स्तर तेजी सें गिर जाएगा जिससें 100 मिलियन लोग प्रत्यक्ष तैर पर प्रभावित होंगें।
विश्व बैक कें प्रकर्शित अध्यययन रिपोट कें अनुसार 2030 तक भारत की जल मांग वर्तमान स्तर सें दोगुनी हों जाएगी एवं फलतः 2050तक आतें-आते भारत का सकल घरेलू उत्पाद ;ळव्च्द्ध 6ः तक गिर जाएगा।
2- अतर्राष्ट्रीय नदी जल विवादों कों सुलझाना- जलशक्ति मंत्रालय का एक प्रमुख कार्य अन्तर्राज्जीय जल विवादों कों सुलझाना भी है। ताकि राज्यों कें मध्य संघवाद की भावना संवैधानिक मूलभाव कें अनुरूप बनी रहें।
वर्तमान में कावेरी जल विवाद (केरल कर्नाटक ,तामिलनाडु ,पुडुचेरी) गोदावरी जल विवाद (महराष्ट्र ,आधँ्र प्रदेश ,मध्य प्रदेश , कर्नाटक ओडिशा) नमर्दा नदी जल विवाद मध्य प्रदेश राजस्थान गुजरात ,महाराष्ट्र वंशधारा जल विवाद आंध्र प्रदेश,ओडिशा इत्यादि कें सहित दर्जनों नदी जल विवाद है। जों राष्ट्रीय शांति ,बंधुतव एव सघीय ढाँचें हेतू खतरा बन रहें है।

3- मानवाधिकारों एवम् सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक-

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के कार्यों कों भी अब इस नवगाठित मंत्रालय कें अधीन सबंद्व कर दिया गया है। अतः स्वच्छ संबधी धारणीय विकास लक्ष्यों की वर्ष 2030 तक प्राप्ति मे यह मंत्रालय महत्वपूर्ण है। उदाहरण MDP- लक्ष्य 6ः स्वच्छ जल एवं स्व्च्छता, MDP लक्ष्य-3ः अच्छा स्वास्थ्य आदि।

इसकें अतिरिक्त नदी व जल भण्डारों की स्वच्छता संबधी कार्यों सें यह पर्यावरणीय व पारिस्थितिकीय हितों क रक्षा जैसें जलीय संसाधनों व जल जीवन में भी सहायक होगी। इससें एक बेहतर पारितंत्र व समृद्व परिवेश निर्मित करनें में मदद मिलेगी।

लोगो कों बेहतर स्वास्थ्य स्वच्छ जल की सहज प्राप्ति द्वारा सबंधी मानवधिकारों की सुरक्षा हेतू भी यह मंत्रालय सहयोगी होगा। जैसें यूनिवर्सल डिम्लेरेशन आफॅ राइट्स कें ।तज दृ 25 कें समुचित जीवन स्तर का अधिकार

4- महिला सशक्तिकरण एवम् सहज जीवन - जल जीवन मिशन कें तहत 2024 तक नल सें जल गंतव्य कें तहत प्रत्येक घर तक ष्च्पचमक ॅंजमतष् पहुचानें कें द्वारा यह मंत्रालय महिला सशाक्तिकरण कें लक्ष्यों की ओर भी महत्वाकाक्षी है। ग्रामीण महलाओं व दूरदराज तथा आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं में घरों सें दूर जल की खोज करनें हेतू यह आवश्यक है। फलतः महिलाओं का जीवन स्तर ऊपर उठानें में मदद मिलेगी।

5- अन्य व्यावहारिक लाभ- लगभग सभी जल परियोजनाएं एक दूसरें की पूरक होती है। अतः जल संबद्व प्रर्बधन कार्यों हेंतू एकीकृत मंत्रालयबनानें सें एकीकृत डाटा प्रबंधन प्रणाली सुद्वढ होगी एवं कार्यो कें निष्पादन में तीव्रता आएगी साथ ही एक ही मचं सें जल प्रबंधन जल उपलब्धता व जल गुणवत्ता स्तर का समन्वित प्रंबधन भी सभवं होगी तथा पृथक मंत्रालय व्यय बोझ कम किया जा सकेगा।

मंत्रालय कें उद्वेश्यों कों साकार बनानें हेतू कुछ अन्य सुझाव-

1- जल प्रबंधन संबधी प्रशासन का सुदृढीकरण- वर्षा जल संचयन की नवीन तकनीक कों जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करनें प्राचीन जल संचयन तकनीकों का संवर्दृन एवं शहरी जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देनें की आवश्यकता है।

शहरों में स्मार्ट सिटी मिशन कें साथ जुडकर स्पोत सिटीज ;ैचवदहम ब्पजलद्ध ाली पर नगर नियोजन कों बढावा दिये जानें की आवश्यकता है। जिसमें भूगर्भीय जल पुनर्भरण कें पर्याप्त प्रंबध कियें जातें है।
ग्रह इडेक्सं परियोजना कें तहत शहरों में किसी बडी बिल्डिंग कों तभी अप्रवूल मिलें जब वहां भूजल पुर्नर्भरण (वर्षा जल हेतू) की अवसंरचना निर्मित की गयी है।
प््राचीन जल की खेती विधियों जैसें बावरी (राजस्थान में )टंका ज्ंदा (थार मरूस्थल क्षेत्र में जल भंडारण की प्राचीन विधि) ,कुड (गुजरात व राजस्थान में) इत्यादि कों सरंक्षण देतें हुए देशव्यापी बनानें कें प्रयास हों।
2- नगरीय व अन्य अपशिष्ट निस्तारणः जल भंडरों की स्वच्छता हेतू - जल भंडार (यथा - पोखर ,झील,नदी ) कों स्वच्छ बनानें हेतु अपशिष्टों कों जल भडारां आदि में विसार्जित होनें से ंरोकना होगा।

औद्योगिकीय अपशिष्ट - उधोगों कें गदें जल कों शुद्व कर ही नादियों में विसार्जित किया जायें तथा उधोगों को वाटर ट्रीटमेंट प्लाटं लगवानें कों कहा जायें।
अन्य आवासीय अपशिष्ट - ठोस कचरा प्रंबधन हेतू अबिंकापुर मॉडल जिसमें कूडें कचरें कों एकत्र करनें ,प्रथक करनें तथा वेस्ट-टू- एनर्जी माडॅल कें तहत उनका प्रयोग ऊर्जा बनानें के करनें की विधि अपनायी जाती है। कों अन्य शहरी क्षेंत्रों में भी प्रचलित किया जायें ताकि कूडा कचरा नादियों में जानें सें बचें
जो ंउधोगों किसी भी मात्रा में अपशिष्ट उत्पन्न करतें है। एवं किसी भी स्तर पर जल प्रदूषित करते उन्हें उन्हें कें तहत जल जनित रोगों कें न्यूनन व सहज दवा उपलब्धता पर निवेश करनें कों कहा जायें।
3- वैज्ञानिक कृषि प्रणाली -बाढं सिचाई भारत में जल संसाधनों हेतू सर्वाधिक प्रमुख खतरा बनी रही है। अतः धारणीय कृषि पद्वतियों कें अधीन टपक फव्वारा सिचाई में लाया जायें ।साथ ही रासायनिक खादों कें प्रयोग कों जैविक खादों सें प्रतिस्थापित करनें की दिशा में प्रयास करकें भी भूगर्भीय व सतही जल सदूषण की समस्या कें अल्पीकरण में मदद मिलेगी।

4- जन जागरूकता एवंज ल सरंक्षण की संस्कृति कों बढावा- मंत्रालय कों नीतिगत स्तर पर कार्य करनें कें साथ -साथ् सामुदायिक कार्यक्रमों जनभागीदारी वालें प्रयासों द्वारा जल संकट न्यून कें प्रयास भी करनें होगें ताकि लोग जल कें महत्व कों समझकर जल सरंक्षण की संस्कृति अपनानें की ओर बढें।

ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीण सरकारी विद्यालयों इत्यदि कें स्तर पर जल संरक्षण संबधी जागरूकता कों प्रमुखता सें प्रसारित करनें पर बल दिया जा सकता है।

इस प्रकार जल संसाधन मंत्रालय का गठन वर्तमान सरकार का जल सरंक्षण व गहराती जल संकट समस्याओं कें समाधान की ओर सराहनीय कदम है। किन्तु इस दिशा में अन्य तकनीकी प्रयास की अपेक्षित है। तथापि भारत कें समक्ष वर्तमान विश्वव्यापी जल संकट समस्या कें दौर में जल संकट समाधान का असाधारण उदाहरण प्रस्तुत कर वैशिक महत्व का केन्द्रबिदु बननें का स्वार्णिम अवस्था है

अन्य प्रमुख जानकारियाँ- मंत्रालय कें अधीन आनें वालें प्रमुख संगठन

 

      1.Central ground water board.

  1. Central soil and Materials Research station.
  2. Central Water and power research station.
  3. Central Water Commissions.
  4. Natianal Institute of hydrology ,Roorkee.
  5. Natianal Water Development Agency
  6. Natianal Projects Construction Corporation Limited.
  7. North Eastern Regional Institute of Water and Land Management (NERIWALM).