सीबेड प्रोजेक्ट 2030

दिनांक: June 12, 2018

sea bed plate tectonics UNESCO

सीबेड परियोजना २०३० का लक्ष्य पानी के भीतर ड्रोन द्वारा व्यापारी जहाजों, मछली पकड़ने की नौकाओं और यहां तक कि खोजकर्ताओं के द्वारा एकत्रित किये गए डेटा का उपयोग करके वर्ष 2030 तक समुद्र तल के मानचित्र को निर्मित करना और दुनिया के लम्बे समय से चले आ रहे रहस्यों में से एक को हल करना है। वास्तव में 190 मिलियन वर्ग किमी पानी के साथ या 650 फीट की गहराई के साथ दुनिया के महासागरों का लगभग 93 प्रतिशत अभी भी मानचित्रित किया जाना बाकी है।

यह प्रोजेक्ट सुनामी तरंग पैटर्न से लेकर प्रदूषण, मछली पकड़ने की गतिविधियों, नौवहन नेविगेशन और अज्ञात जमा खनिज आदि पर भी प्रकाश डालेगा। 

http://prepareias.in/

यह परियोजना जापान के “निप्पॉन फाउंडेशन” और “जीईबीसीओ” (विशेषज्ञों के गैर-लाभकारी संगठन) के बीच की एक सहभागिता है तथा ये विशेषज्ञ समुद्र तल के मानचित्रीकरण में पहले से ही शामिल है। जीईबीसीओ अंतर्राष्ट्रीय जल विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र सांस्कृतिक एजेंसी यूनेस्को के तहत काम करता है। यह परियोजना, जिसकी अनुमानित लागत 3 बिलियन डॉलर है, राष्ट्रीय शोध निकायों के लिए तट के करीब का पानी छोड़ देगी।

सम्बंधित तथ्य 

सागर तल के फैलने से प्लेट टेक्टोनिक्स में महाद्वीपीय ड्रिफ्ट थ्योरी के व्याख्या करने में मदद मिलती है। जब समुद्री प्लेटें अलग हो जाती हैं तो यह तनाव लिथोस्फियर में फ्रैक्चर होने का कारण बनता है। समुद्रतल फैलाने वाले कारको के लिए प्रेरक बल मैग्मा दबाव तथा टेक्टोनिक प्लेटो का खिंचाव है, हालांकि आमतौर पर तल को फैलाने का महत्वपूर्ण कारक मैग्मा होती है।