वन धन विकास योजना

दिनांक: July 02, 2019

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भारत सरकार ने जनजातीय समुदाय के लोगों को लाभान्वित करने के लिये वन धन विकास योजना प्रारम्भ की है।योजना के अंतर्गत, ट्राइफेड(ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) गौण वनोत्‍पाद (एमएफपी) आधारित बहुउद्देशीय वन धन विकास केंद्र स्‍थापित करने में मदद करेगा। यह 10 स्‍वयं सेवी समूहों (एसएचजी) का केंद्र होगा, जिसमें जनजातीय क्षेत्रों में 30 एमएफपी एकत्रित करने वाले शामिल होंगे।
वन धन मिशन गैर-लकड़ी के वन उत्पादन का उपयोग करके जनजातियों के लिए आजीविका के साधन उत्पन्न करने की पहल है। जंगलों से प्राप्त होने वाली संपदा, जो कि वन धन है, का कुल मूल्य दो लाख करोड़ प्रतिवर्ष है। इस पहल से जनजातीय समुदाय के सामूहिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहन मिलेगा। वन धन योजना का उद्देश्य परंपरागत ज्ञान और कौशल को सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से और निखारना भी है। वन संपदा समृद्ध जनजातीय जिलों में वन धन विकास केंद्र जनजातीय समुदाय के जरिये संचालित होंगे।

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योजना का उद्देश्‍य
1 -इस पहल का उद्देश्‍य प्राथमिक स्‍तर पर एमएफपी में मूल्‍य वृद्धि कर ज़मीनी स्‍तर पर जनजातीय समुदाय को व्‍यवस्थित करना है।
2-इसके तहत जनजातीय समुदाय के वनोत्‍पाद एकत्रित करने वालों और कारीगरों के आजीविका आधारित विकास को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।
3-इस पहल के ज़रिये गैर लकड़ी वनोत्‍पाद की मूल्‍य श्रृंखला में जनजातीय लोगों की भागीदारी वर्तमान 20 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 60 प्रतिशत होने की उम्‍मीद है।
4-एमएफपी या अधिक उपयुक्त के रूप में उल्लिखित गैरलकड़ी वनोत्पाद (एनटीएफपी) देश के लगभग 5 करोड़ जनजातीय लोगों की आय और आजीविका का प्राथमिक स्रोत है।
5-गौरतलब है कि देश में अधिकतर जनजातीय ज़िले वन क्षेत्रों में हैं। जनजातीय समुदाय पारंपरिक प्रक्रियाओं से एनटीएफपी एकत्रित करने और उनके मूल्यवर्धन में पारंगत होते हैं।
    यही कारण है कि स्थानीय कौशल और संसाधनों पर आधारित जनजातीय लोगों के विकास का यह आदर्श मॉडल एनटीएफपी केंद्रित होगा।

यह योजना केन्‍द्रीय स्‍तर पर महत्त्‍वपूर्ण विभाग के तौर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर महत्त्वपूर्ण एजेंसी के रूप में ट्राइफेड के माध्‍यम से लागू की जाएगी।

योजना की विशेषताएं
1-ईकाई स्‍तर पर स्वयं सहायता समूह के 30 सदस्‍यीय समूह के द्धारा उत्‍पादन को एकत्र किया जाएगा।
2-वन धन केंद्र वन्‍य उत्‍पादों का संरक्षण करेंगें। जंगलों में मिलने वाली दुर्लभ व सामान्‍य जड़ी बूटियों का ठीक प्रकार से सरंक्षण व विपणन करना।
3-वन धन विकास केंद्रों पर सिलाई उपकरण, उत्‍पादों को सुखाने वाले उपकरण, छोटी कटिंग मशीन आदि की भी व्‍यवस्‍था की जाएगी।
4-उपरोक्‍त मशीनों व उपकरणों के इस्‍तेमाल से वन्‍य उत्‍पादों को बेहतर समर्थन मूल्‍य उपलब्‍ध कराया जाएगा।
5-प्रत्‍येक वन धन केंद्र के पास सरकारी अथवा पंचायत स्‍तर पर एक भवन अवश्‍य होगा।
6-मशीनों के इस्‍तेमाल से वन्‍य उत्‍पादों को सुखा कर व उनकी पैकेजिंग करके उनके मूल्‍य में उचित वृद्धि की जाएगी ताकि आदिवासी समाज को उनकी वस्‍तुओं का उचित मूल्‍य प्राप्‍त हो सके।
7-वन धन विकास केंद्रों पर प्रशिक्षण पाने वाले 30 सदस्‍यीय समूह के लिये कच्‍चा माल, ट्रेनिंग किट, ट्रेनिंग बुक, कलम आदि सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जाएंगीं।
8-वन धन विकास केंद्रों पर स्वयं सहायता समूह के लिये कार्यशील पूंजी का प्रबंध बैंकों तथा एनएसटीएफडीसी के द्धारा किया जाएगा।
9-एक ही गांव में वन धन विकास केंद्र ऐसे 10 स्वयं सहायता समूह बनाएगा जो सफलता पूर्वक वन धन केंद्रों को का संचालन करेंगें। प्रत्‍येक समूहों की सफलता को देखते हुए इन केंद्रों पर भवन और गोदाम आदि को पक्‍का कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
10-योजना के तहत न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य के दायरे में महुआ फूल, महुआ के बीज, लाख के बीज, साल के बीज, साल की पत्तियां, पहाड़ी झाड़ू, इमली, बांस, चिरौंजी, शहद, आम, आंवला, तेजपत्‍ता, इलायची काली मिर्च, हल्‍दी, सूखा हुआ अदरक, दालचीनी, चाय, कॉफी के बीज आदि को लाया गया है। साथ ही इसके अतिरिक्‍त कुछ और चीजों को इस सूची में शामिल किया जा सकता है।

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय