पेराडाइज़ पेपर्स: पनामा पेपर्स के बाद के नया खुलासा, जानिए क्या है मामला और क्या है ऑफ़शोर फाइनेंस

दिनांक: November 07, 2017

ICIJ tax haven amitabh bacchan appleby

पनामा पेपर्स लीक होने के 18 महीने बाद एक और बड़े वित्तीय डेटा से पर्दा हटा है. इसे जर्मन अख़बार ज़्यूड डॉयचे त्साइटुंग ने हासिल किया है, इसकी जांच इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने 96 समाचार एजेंसियों के साथ की है.इस लीक को पेराडाइज़ पेपर्स कहा जा रहा है. इसमें 1.34 करोड़ दस्तावेज़ लीक हुए हैं. इनमें से अधिकतर दस्तावेज़ विदेशी निवेश देखने वाली एक कंपनी के हैं.इस खुलासे के मुताबिक, दुनिया भर के ताकतवर और अमीर लोग टैक्स हैवेन देशों में गुप्त तरीके से बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं. पैराडाइज़ दस्तावेज विदेशों में कर बचाने के लिए किए गए निवेश या बैंकों में जमा संपत्ति की जांच से संबंधित हैं. इनमें भारत के कई कॉरपोरेट, अमीर और प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल हैं.

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पत्रकारों के इस अंतरराष्ट्रीय संगठन ने बरमूडा और सिंगापुर स्थित फर्मों के दस्तावेज लीक किए हैं. इनमें 714 भारतीयों के नाम हैं. इनमें मोदी सरकार में मंत्री जयंत सिन्हा, भाजपा सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा, अमिताभ बच्चन, संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त, उद्योगपति विजय माल्या, कांग्रेस नेता अशोक गहलोत, डॉ अशोक सेठ, कोचिंग कंपनी फिट्जी, नीरा राडिया आदि के नाम सामने आए हैं.रिपोर्ट में ओमिदयार नेटवर्क का जिक्र है, जिससे केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा भी जुड़े थे.

पेराडाइज़ पेपर्स का स्रोत :-

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ज़्यादातर दस्तावेज़ ऐपलबी कंपनी के हैं. बरमुडा स्थित ये कंपनी क़ानूनी सेवाए देती है. ये अपने क्लाएंट्स को शून्य या बेहद कम कर वाले देशों में कंपनियां स्थापित करने में मदद करती है.

ऑफ़शोर फाइनेंस का तत्पर्य:-
इसका मतलब है कि ऐसा स्थान जो किसी के अपने देश के क़ायदे क़ानूनों से बाहर है, जिसके ज़रिए लोग या कंपनियां पैसे, संपत्तियां या लाभ कहीं और भेजकर कम टैक्स अदा कर ज़्यादा फ़ायदा उठा सकें.ऐसे स्थानों को आम भाषा में टैक्स हेवन कहा जाता है. इंडस्ट्री की भाषा में इन्हें ऑफ़शोर फ़ाइनेंसियल सेंटर्स (ओएफ़सी) कहा जाता है.
ये आमतौर पर स्थिर, भरोसेमंद और गुप्त होते हैं और अक्सर छोटे द्वीप होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ़ द्वीप ही होते हैं, और इनमें ग़लत कार्यों को रोकने के लिए क्या उपाय हैं इसे लेकर भिन्नताएं हो सकती हैं.

एक तुलनात्मक अध्ययन:-

xभारत सर्कार की कार्यवाही:-
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने जानकारी दी है कि सरकार ने इस मामले की जांच की निगरानी कई एजेंसियों के एक समूह को सौंप दी है। जांच एजेंसियों के इस समूह की अध्यक्षता सीबीडीटी के चेयरमैन करेंगे। इस समूह में सीबीडीटी, ईडी, आरबीआइ और एफआइयू के प्रतिनिधि होंगे।